पृथ्वी के प्रमुख परिमण्डल

नमस्कार, आज हम पृथ्वी के प्रमुख परिमंडलों के बारे में जानेंगे। पृथ्वी के प्रमुख परिमण्डल हैं-
भू मण्डल, जल मण्डल, वायु मण्डल और इसके साथ साथ जीव मण्डल को भी इसमें शामिल किया जाता है।
इनका संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है:


भूमण्डल
पृथ्वी के ठोस भाग को भूमंडल कहा जाता है। यह
भू-पर्पटी की चट्टानों तथा मिट्टी की पतली परतों
का बना होता है जिसमें जीवों के लिए पोषक तत्व
पाए जाते हैं।

पृथ्वी की सतह को दो मुख्य भागों में बाँटा जा सकता है बड़े स्थलीय भू-भागों
को महाद्वीपों के नाम से जाना जाता है तथा बड़े जलाशयों को महासागरीय
बेसिन के नाम से जाना जाता है। विश्व के सभी महासागर आपस में एक दूसरे
से जुड़े हुए हैं।

विश्व का सबसे ऊँचा शिखर माउण्ट एवरेस्ट समुद्र तल से 8848 मी ऊँचा है।

विश्व का सबसे गहरा भाग प्रशान्त महासागर का मेरियाना गर्त है, जिसकी
गहराई 11022 मी है।

जलमण्डल
पृथ्वी को नीला ग्रह कहा जाता है, क्योंकि इसका 71% भाग जल तथा 29% भाग
स्थल है। जल की अधिकता के कारण यह अन्तरिक्ष से नीला नजर आता है।

जलमण्डल में जल के सभी रूप उपस्थित हैं। इसमें महासागर एवं नदियाँ, झीलें,
हिमनदियाँ, भूमिगत जल तथा वायुमण्डल की जलवाष्प सभी सम्मिलित हैं।

पृथ्वी पर पाए जाने वाले जल का 97% से अधिक भाग महासागरों में पाया
जाता है एवं वह इतना अधिक खारा होता है कि मानव के उपयोग में नहीं आ
सकता है। शेष जल का बहुत बड़ा भाग बर्फ की परतों एवं हिमनदियों तथा
भूमिगत जल के रूप में पाया जाता है।

जल का बहुत कम भाग अलवण जल के रूप में पाया जाता है, जो मनुष्य के
इस्तेमाल में आता है। यही कारण है कि नीले ग्रह में रहने के बावजूद हम पानी
की कमी महसूस करते हैं।

वायुमण्डल
हमारी पृथ्वी चारों ओर से गैस की एक परत से घिरी हुई है, जिसे वायुमण्डल कहा जाता है। वायु की यह पतली परत इस ग्रह का महत्त्वपूर्ण एवं अटूट भाग है। यह हमें ऐसी वायु प्रदान करती है जिससे हम लोग साँस लेते हैं। यह वायुमण्डल हम लोगों को सूर्य की कुछ हानिकारक किरणों से बचाता है।

वायुमण्डल 1600 किमी की ऊँचाई तक फैला है। वायुमण्डल को उसके घटकों, तापमान तथा अन्य के आधार पर पाँच परतों में बाँटा जाता है। इन परतों को
पृथ्वी की सतह से शुरू करते हुए
क्षोभमण्डल, समतापमण्डल, मध्यमण्डल,
आयनमण्डल तथा बहिर्मण्डल कहा जाता है।

वायुमण्डल मुख्यतः ऑक्सीजन एवं नाइट्रोजन का बना है जोकि साफ तथा शुष्क हवा का 99% भाग है। आयतन के अनुसार नाइट्रोजन 78%, ऑक्सीजन
21% तथा दूसरी गैसें जैसे कार्बन डाइऑक्साइड, ऑर्गन इत्यादि की मात्रा 1%
है।

ऑक्सीजन साँस लेने के लिए आवश्यक है, जबकि नाइट्रोजन प्राणियों की वृद्धि
के लिए आवश्यक है। कार्बन डाइऑक्साइड यद्यपि बहुत कम मात्रा में है,
लेकिन यह पृथ्वी के द्वारा छोड़ी गई ऊष्मा को अवशोषित करती है, जिससे पृथ्वी
गर्म रहती है। यह पौधों की वृद्धि के लिए भी आवश्यक है।

जीवमण्डल
जीवमण्डल स्थल, जल तथा वायु के बीच का एक सीमित भाग है। यह वह भाग है जहाँ जीवन मौजूद है। यहाँ जीवों की बहुत-सी प्रजातियाँ है. जबकि सूक्ष्म जीवों तथा बैक्टीरिया से लेकर बड़े स्तनधारियों के
आकार में पाई जाती हैं।

मनुष्य सहित सभी प्राणी, जीवित रहने के लिए एक-दूसरे से तथा जीवमण्डल से जुड़े हुए हैं।

जीवमण्डल के प्राणियों को मुख्यतः दो भागों (जन्तु जगत एवं पादप जगत) में विभक्त किया जा सकता है।

पृथ्वी के तीनों परिमण्डल (भूमण्डल, जलमण्डल, वायुमण्डल) आपस में पारस्परिक क्रिया करते हैं तथा एक-दूसरे को किसी-न-किसी रूप में प्रभावित करते हैं।

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