निराशा को त्याग कर आशावादी बनें।

बिल्कुल सत्य कहा है Winston Churchill ने, जो इंसान निराशावादी होता है वो हर वस्तु, हर परिस्थिति में निराशा ही देखता है। अपनी इस निराशावादी स्थिति के कारण वो समय के अनुसार उचित अवसरों का लाभ उठाना नहीं जानता। उसे बस यही चिंता लगी रहती है कि कहीं ऐसा ना हो जाए, कहीं वैसा ना हो जाए। अपने नकारात्मक विचारों के वशीभूत वो समय के साथ चल पाने में विफल रहता है।
दूसरी ओर जो व्यक्ति आशावादी दृष्टिकोण वाला होता है, उसके सामने चाहे कितनी भी विपरीत परिस्थितियां आ जाएं परन्तु वो अपने धैर्य का त्याग नहीं करता है।
विपरीत स्थिति में भी अवसरों को अपने अनुकूल बनाते हुए उसका लाभ उठाना वो अच्छी तरह से जानता है।
इसलिए हमें अपने नकारात्मक विचारों का त्याग करते हुए आशावादी दृष्टिकोण को अपनाना होगा।
केवल तभी हम समय के महत्व को समझ पाएंगे; केवल तभी हम अपने महत्व को समझ पाएंगे।

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